कबो गधा के हजामत…………
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अक्षत रमाकांत नाई से पूछलय: कबो गधा के हजामत बनईले हवा|
रमाकांत नाई : नाही त, पर आज तू बईठा, हम कोशिश करत बानी|
गुडिया (रमेश से)- सुना हो, अगर तुहार इहि रफ्तार से सिर के बाल झड़त रहल त एक दिन हम तुहें तलाक दे देब| हमय गंजा लोग बिलकुल पसंद न हवन।
रमेश (चौंकके)- अरे! हम हूँ कितना बेवकूफ हई, कुछ अच्छा मागले के बजाए भगवान से हरदम कहत रहनि कि हमार बाल सही सलामत रहे
रवि पेड़ के ऊपर उलटा लटकल रहलय|
अर्जुन - तू पेड़ पे कहें उलटा लटकल हवा|
रवि - सर दर्द के गोली खाईले बानी, कहीं गोली पेट में न चल जाय, यही माले ……




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