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झींगा शेर तालाब के किनारे कंस झुंडों के बिच………








झींगा शेर तालाब के किनारे कंस झुंडों के बिच में अपने भूखे बच्चन के साथ अउर पत्नी के साथ बइथल सूरज के मीठी धुप में ऊंघ त रहल ह |इ समय ओकर आखे बंद रहल ह अउर उ अपने सुनहरे सपनो के दिनों में खोयल रहल ह ,ओके अपने जवानी के दिन याद आवत रहल जब उ खूब सकत्साली रहल उहू दिन के कवन रंग रहल ह , का ताकत रहल , शरिर के केतना ताकत रहल का मजाल रहल की कोई शिकार हाथ से निकल जाय | अगर उ दिन में दुई तिन शिकार के आगे भागे के रहल त तबो न थकत न रहली |




लेकिन अब उम्र के तकाजा रहल की अब एक शिकार खातीं कई कई घंटा तक तालाब के किनारे बईठे के पडत बा अउर त कबो कबो पूरा दिन इंतजार करे के पड़ेला अउर न मिले त भूखल ही सोवे के पड़े ला ओकर इ हालत बुढापे के कारण ओके पूरा दिन कौनो शिकार हो पावत न रहल कहें से की ओकर शरिर की सक्ती क्षीण हो गईल रहल ह अब उ कमजोर जानवर से शिकार कर के पेट भरत रहल ह |
लेकिन आज सुबह से शाम होवे के बा , त बो कौनो शिकार न रहल |झिनागा शेर के मंद से कुछ दूर पे ही शेरू नाम के एक गीदड़ भी अपनी पत्नी के बच्चो के साथ एक बिल में साथ रहत रहन ह |शेरू के परिवार भी शेर के उपर ही निर्भेर रहन काहें से की शिकार कइले के बाद जवन बचय उ शेरू के परिवार कई दिन तक खाय |अउर ओ कुलिहीं के बिच केतना दोस्ती रहल ह |




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