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हमतव देखे पुरुब्वा के झोका बबुनी.








हमतव देखे पुरुब्वा के झोका बबुनी.
हमके रास्ते म देबू तू धोका बबुनी..

हमतव देखे पुरुववा के चाँद बबुवा.
हमके सेतय म देबेया बिसार बबुवा..

हमारे मनवा म नइखे ब पाप बबुनी.
जोदाब सातव जनाम्वा के तार बबुनी..

हमरा पत्थर करेजवा न आ बबुवा..
हमारी नेहिया से करा न खिद्वाद बबुवा..

हमारी आखिया के बातू तू ज्योति बबुनी..
तोहके विपदा से राखावे हम ओट बबुनी..





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admin

2 Responses to “ हमतव देखे पुरुब्वा के झोका बबुनी. ”

  1. तो देश तरक्की ख़ाक करेगा।

    जब अफसर सारे नेता गण

    तिरछी कलम चलायेगे। तो ।

    देश तरक्की ख़ाक करेगा।

    देश के रक्षक भक्षक बहन कर

    खून की नदी बहाते है॥

    बड़े बड़े अफसर बाबू मिल कर

    जनता पर धौस जमाते है,,

    ऐसे ठग से राम बचाए

    बच्चे क्या पढ़ पायेगे॥तो

    देश तरक्की ख़ाक करेगा।

    जब नेता घपला करते है।

    भरते रिश्तेदारो की झोली॥

    अब सच्चाई का वास नही ।

    बेईमानी की हवा जो डोली॥

    मेरे देश के शिक्षक गण ।

    अय्याशी का जब पाठ पधायेगे..तो

    देश तरक्की ख़ाक करेगा।

    शंभू नाथ अवधी।

  2. भरी जवानी झोका आवा॥
    उड़ गैलेसब शर्म के फूल॥
    दुइनव जोबनवा अक्डत राहिले॥
    कई गैलीबचपन म भूल ॥
    जब बही जवानी तारा तारा…जब बही जवानी तरा तरा
    सावन मॉस म बरसे बदारिया ॥
    तन अंगडाई लेत ॥
    कराय इशारा खडा पड़ोसी॥
    रसगुल्ला मुह म देत॥
    chhuwat badanwaa chhutay goli॥
    हसे सवंवा झराझरा॥जब बही जवानी तरा तरा ॥
    मुह मुह से मुह चुम्मा होइगा॥
    नरवा म मचा bawaal॥
    dhaDkan तेज़ bhail jiyaraa म॥
    शांत bhail utpaat॥
    कुछ देरी म पस्त शरिरिया॥
    चले उठल्लू मरा मरा ..जब बही जवानी तरा तरा

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