मैंने कब तेरी बेवफ़ाई का चर्चा खुलेआम किया ।
क्यूँ ज़ुबान छीनी मेरी , क्यूँ मुझे बेज़ुबान किया ।
मैंने कब तेरी बेवफ़ाई का चर्चा खुलेआम किया ।
ये माना के मैं निभा ना सका रस्म-ए-उल्फत ,
तुने भी कहाँ – कब , वफ़ा का कोई काम किया ।
इसी से बहल जायेगा दिल नादां ही तो है ,
तेरी गली में करके सज़दे हमने बहुत नाम किया ।
परदे [...]
अउर कौनो बंधन न ह , पर दिल के बंधन तोडा ना
अउर कौनो बंधन न ह , पर दिल के बंधन तोडा ना
जवन ह हमरे पास, ह तुहार , येसे तु मुख मोडा ना ।
बोला चाहे न कुछ बोला, मन के अपने कहेदा ,
दुनिया में रहे के बा मुश्किल, सपना में त रहेदा।
मन जौनो बात ह [...]



