कॉपीराइट
यह संभावना बहुत ही कम है कि किसी रचनाकार या प्रकाशक को उनके द्वारा लिखी गई या प्रकाशित की गई किसी रचना के ई-भोजपुरिया (पुरबिया बयार) में हो। ई-भोजपुरिया (पुरबिया बयार) पूरी तरह से अव्यावसायिक जालस्थल है। चार क्षात्रों ने मिलकर इस ई-भोजपुरिया.कॉम का निर्माण किया हैं.अपने मिटटी के लगाव और जज्बातों ने हमें विवश किया की पूरब की संस्कृति आदि को दुनिया के आगे बढाया जाए. इस पर सारी सूचना, गीत, लोकगीत, आदि मुप्त हैं. हो सकता है की आगे के विकास के लिए हम कुछ विज्ञापन भी इस पर रख सकते हैं. हम लोगो का एकमात्र उद्देश्य हैं की पूरब को इंटरनैट पर एक जगह प्रतिष्ठित करना है ताकि पूरा पुरबिया समाज इसका लाभ उठा सके।
ई-भोजपुरिया (पुरबिया बयार) में संकलित सभी रचनाओं के साथ रचनाकारों का नाम दिया जाता है जिससे रचनाकार को उचित श्रेय मिलता रहे.
प्रायः मुद्रण माध्यम के पाठक और इंटरनैट के पाठक अलग-अलग होते हैं। जो लोग पुस्तक खरीदकर पढ़ने में रुचि रखते हैं -उन्हें इंटरनैट पर उपलब्ध मूल्यरहित सामग्री भी अच्छी नहीं लगती और वे पुस्तक खरीदकर ही पढ़ते हैं। साथ ही लोग पुस्तकें इस लिये भी खरीदते हैं क्योंकि पुस्तकों का संकलन किया जा सकता है और जब चाहे उसे पढ़ा जा सकता है। तथापि ई-भोजपुरिया (पुरबिया बयार) , किसी भी रचनाकार या प्रकाशक को किसी भी तरह की आर्थिक हानि नहीं पहुँचाता।
हम लोगो का यही प्रयाश है की हम आप लोगो को सबसे अलग, और अद्वितीय पठान सामग्री उपलब्ध कराएं.फिर अगर भूल-चूक से किसी रचनाकार की रचना यहाँ प्रकाशित हो गयी हो और उन्हें कोई आपत्ति है तो उनसे अनुरोध कि अनजाने में हुई भूल को क्षमा करने का प्रयाश करें.अगर आप को कोई आपत्ति हो तो कृपया हमें Rajesh@eBhojpuria.com मेल करें. अगर वह आपकी रचना सिद्ध होती है तो उसे ई-भोजपुरिया.कॉम(पुरबिया बयार) से हटा दिया जायेगा.




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