कैफी आजमी
कैफी आजमी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मेज़वान नामक गाँव में सन १९१९ में हुआ था. ये बचपन में सईद अख्तर हुसैन रिज़वी के नाम से जाने जाते थे.इनके पिता सईद फ़तेह हुसैन रिज़वी एक ज़मींदार थे लेकिन उन्होने तहसील में भी काम किया.अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बिपरीत हो कर इन्होने अपने पुत्र को लखनऊ आधुनिक शिक्षा के लिए भेजना चाहते थे लेकिन कैफी जी को ये आधुनिक शिक्षा-दीक्षा नसीब नही हुयी और उन्हें सुलतान-उल-मदरिस में दाखिला करा दिया गया.
११ वर्ष की उम्र में कैफी आज़मी ने अपना पहली ग़ज़ल (इतना तो जिंदगी में किसी की खलल पड़े) लिखा.और इसके बाद उन्हें मुशायरा में आमंत्रित किया गया, और इनकी रचना को काफ़ी दाद मिली. सबसे ज्यादा सराहना मुशायरा के अध्यक्ष महोदय मनी जैसी ने दिया.
इन सब की वज़ह से इनके बड़े बुजुर्ग और पिता जी नाराज़ थे, वो नही चाहते थे की उनका बेटा ग़ज़ल आदि लिखे करे और मुशायरा आदि में जाए. लेकिन कैफी आज़मी साहब की ग़ज़ल-शायरी के प्रति लगन और बढ़ती गयी. एक दिन इनके पिता जी ने कैफी जी को दो तीन लाईने दी और बोले की इन को जोड़ के एक ग़ज़ल बनाओ, कैफी जी ने पिता जी के इस शर्त को स्वीकार किया और एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना कर दी. और इससे इनके पिता जी काफ़ी प्रभावित हुए.यही ग़ज़ल अगे चल कर बहुत प्रशिद्ध हुयी जिसको बेगम अख्तर ने गया.
२४ वर्ष की आयु में इन्होने कानपुर में एक कपड़े की मिल में काम करना शुरू किया, और कुछ दिन बाद ये मुंबई चले गये. १९४७ में एक मुशायरे में भाग लेने के लिए ये हैदराबाद गए , और इनकी मुलाकात शौकत से हुयी, और ये मुलाकात प्यार में बदल कर शादी में तब्दील हो गयी .इनकी दो संताने हुयी “शबाना आजमी ” जो हिन्दी फ़िल्म जगत की एक मशहूर नायिका हैं और दुसरे इनके पुत्र बाबा आजमी जो मशहूर कैमरामैन हैं.
१९५२ में कैफी आजमी ने फ़िल्म बुजदिल के लिए अपना पहला गीत लिखा.फिर यहूदी की बेटी (1956), परवीन (1957) , मिस पंजाब मेल (195
और ईद का चाँद(195
आदि फिल्मो के लिए गीत लिखा.
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