डा.राजेंद्र प्रसाद
डा.राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के तत्कालीन सारण और आज के सिवान जिले के जिरादेई में तीन दिसंबर 1884 को हुआ. इनके पिता का नाम महादेव सहाय तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी था.इनके पिता जी पर्सियन थे और संस्कृत भाषा के विद्वान भी थे.पाँच वर्ष की ही उम्र में राजेंद्र प्रसाद को मौलवी के पास पर्शियन पढने के लिए भेजा गया.और इसके बाद प्राथमिक शिक्षा के लिए छपरा जिला स्कूल भेजा गया.और फिर इसके बाद अपने बड़े भाई महेंद्र प्रसाद के साथ पटना का घोष अकादमी में पढने जाने लगे.१८ वर्ष की उम्र में ही इन्होने कलकत्ता विश्वविद्यालय का एंट्रेंस उत्तीर्ण किया.
१२ वर्ष की कम उम्र में ही इनका विवाह राजवंशी देवी से कर दिया गया.और 13 वर्ष की उम्र में पत्नी घर आ गई थी. कहा जाता है की 66 वर्ष के वैवाहिक जीवन में 44 या 45 माह ही दोनों साथ रहे।66 वर्ष की लंबी अवधि में अपनी धर्मपत्नी को चार वर्ष से भी कम समय दिया और शेष जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया.वहीं, भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने की वजह से वे अगस्त, 1942 से जून, 1945 तक जेल में रहे। 1946 से 50 तक वे संविधान सभा के अध्यक्ष रहे और अंतरिम सरकार में (1946 से 4
उन्होंने कृषि और खाद्य मंत्रालय देखा। डा. प्रसाद दो बार राष्ट्रपति रहे। एक सरल और विवेकशील राष्ट्रभक्त के रूप में डा. प्रसाद हमेशा पहचाने गए।
१९२० में इन्होने अपने वकालत का पेशा छोड़ कर उन्होंने गांधीजी का असहयोग आंदोलन में साथ देने के लिए बिहार में भी असहयोग आंदोलन चलाया और इस आंदोलन ने ब्रिटिश राज को हिला कर रख दिया।गांधीजी के दांडी मार्च का अनुसरण करते हुए डा. प्रसाद के नेतृत्व में पटना में भी नमक सत्याग्रह आंदोलन चलाया गया और इसके लिए राजेंद्र प्रसाद को छ: माह की कैद हुई। अक्टूबर 1934 में डा. प्रसाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। 1939 में नेताजी बोस की पदावधि समाप्त होने पर व आचार्य कृपलानी के इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला।
Dr.Rajendra Prasad, Biography,Profile of india first President, birth, career.




Leave a Reply